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कान्हा

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कान्हा तेरे रंग में रंगी हु में फिर से, बासुरी की धुन से सजी हु में फिर से, तेरे मधुर गीतों से रंग और बढ़ जाये मेरा, तेरे लिए सजी हु में आज फिर से, मेहदी हाथों में सजा दी तेरे नाम की, बिंदिया माथे पर सजा दी तेरे नाम की, तेरे मधुर गीतों पर खो गयी आज फिर से, तेरी राधा  हो गई हु में आज फिर से। कान्हा तेरे रंग में रंगी में आज फिर से।।।

युद्ध

युद्ध है यह युद्ध है, कोरोना काल का युद्ध है, रहे अडिग रहे सजग  डटे रहेंगे हम युद्ध है यह युद्द है कोरोना काल का युद्ध है न थकेंगे न रुकेंगे न डरेंगे कभी, बस बढ़ते चलेंगे हम, युद्ध है यह युद्ध है कोरोना काल का युद्ध है।।।। #अन्नू

ओलंपिक पदक

बाधाओं से अपनी लड़ मंजिल जो पा जाते है , आग हवा पानी से भी नहीं वो घबराते है ।। टूटी चप्पल सर पर खप्पर ख्वाब आसमान ले जाते है , सच मानों बाधाओं से अपनी लड़ मंजिल वही पाते है ।। हर रोज एक रेस नई है हार से नहीं घबराते है , टूटे जो होंसले कभी ख्वाबों से फिर पँख नए चुराते है ।। नई चेतना , नया सवेरा उम्मीद नई फिर आई है , ओलंपिक की इस नवल बसन्त की सबको खूब बधाई है ।। हार जीत की नहीं रेस ये राष्ट्र सम्मान की बेला है , पैरों में ख्वाब बांध लें सोच तू ही रेस का घोड़ा है ।। सच मानों बाधाओं से अपनी लड़ मंजिल यही पाते है बाधाओं से अपनी लड़ मंजिल यही पाते है ।।

आवाज

रोज आवाज देती हूं, वह सुनता नही, रोज बुलाती हु, वह आता ही नही, न घर है न मंजिल मेरी, रोज याद करती हूं, वह सुनता ही नही, कितनी आवाज ओर दु, कितना उसे ओर बुलाऊ, दिल जबकि जानता है, वह आएगा नही, क्यो यह किया उसने, सिर्फ अपने लिए, क्या वह यह भूल गया, हम सब जी रहे थे उसके लिए।

दिल झूठा है

सच दिल झूठा है, कभी ठगता है, कभी छलता है, सच दिल झूठा है, वादे करता है, तसल्ली देता है, कभी हँसता है, कभी रोता है, सच दिल झूठा है, अपने को पराया, जल्दी करता है, झूठी दिलासा देता है, सच दिल झूठा है।।

बेरंग तितली

तितली की तरह उड़ रही हु इस उम्र में भी में, यह कोई आम बात नही मुझमें जिस दिन पंख कट जायँगे मेरे, उस दिन हैरान हो जाओगे तुम भी, फिर कहोगे चल फिर से उड़ चलते हैं कहीं दूर, फिर कहोगे चल बच्चा बन जाते हैं फिर एक बार, तुम ही चाहते हो न कि में अब न उड़ सकू, डर लगता है जमाने से या शर्म आती है खुद से तुम्हें, तुम्हारी उम्र का तो पता नही  पर मेरी उम्र से डर लगता है न तुम्हें, तितली बनना इतना आसान नही, कुदरत की देन हैं यह भी, कई तितलियों में एक ख़ास तितली होती है, वह खास तितली हु में भी, ख़ुद पर भरोसा है मुझे अब भी आत्मविश्वास बुलन्द है मेरा, बस समय का इंतजार है अब जिस दिन पर कट जाएंगे मेरे, फिर कहूंगी तुमसे क्यों अब कैसे मुझे रस पिलाओगे अब कैसे फिर मुझे उड़ाओगे, जाने वह दिन कब आएगा, जब में आसमान से जमीन और सो जाउंगी।। बेरंग तितली।।।।।

माँ

मै माँ हूँ, मानो तो गंगा हु, उस पर बहती धारा हु, मै माँ हूं, सुबह से शाम तक, न् थकने वाली मशीन हु, मानो तो स्वर्ग हु, उड़ने वाली हवा हु, मै माँ हु, बच्चों की पीड़ा को सहने वाली दवा हु, उनके सुख दुख  की साथी हु, मै माँ हु, सरल ह्रदय हु, दुर्गा हु, काली हु, घर की रखवाली हु, मै मॉ हु, मात्र दिवस की शुभकामनाएं #स्वयं #की #कलम #से।।। #अन्नू अनिता पन्त