बेरंग तितली

तितली की तरह उड़ रही हु इस उम्र में भी में,
यह कोई आम बात नही मुझमें
जिस दिन पंख कट जायँगे मेरे,
उस दिन हैरान हो जाओगे तुम भी,
फिर कहोगे चल फिर से उड़ चलते हैं कहीं दूर,
फिर कहोगे चल बच्चा बन जाते हैं फिर एक बार,
तुम ही चाहते हो न कि में अब न उड़ सकू,
डर लगता है जमाने से या शर्म आती है खुद से तुम्हें,
तुम्हारी उम्र का तो पता नही 
पर मेरी उम्र से डर लगता है न तुम्हें,
तितली बनना इतना आसान नही,
कुदरत की देन हैं यह भी,
कई तितलियों में एक ख़ास तितली होती है,
वह खास तितली हु में भी,
ख़ुद पर भरोसा है मुझे अब भी
आत्मविश्वास बुलन्द है मेरा,
बस समय का इंतजार है अब
जिस दिन पर कट जाएंगे मेरे,
फिर कहूंगी तुमसे क्यों
अब कैसे मुझे रस पिलाओगे
अब कैसे फिर मुझे उड़ाओगे,
जाने वह दिन कब आएगा,
जब में आसमान से जमीन और सो जाउंगी।।
बेरंग तितली।।।।।

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